हल्दी की खेती कैसे करें? यह आधुनिक तकनीक से होती है ज्यादा उपज।

हल्दी की खेती

हल्दी की खेती से अपेक्षा

हल्दी की फसल की अपेक्षित उपज

120-150 क्विंटल प्रति एकड़

अपेक्षित अवधि

बुवाई से 250-270 दिन

खेती में अपेक्षित खर्चा (रुपये)

77,000

अपेक्षित लाभ (रुपये)

2,75,000

खेती के लिए उपयुक्त जलवायु परिस्थितियाँ

जलवायु

  • प्रारंभिक विकास चरणों के दौरान ज्यादा बारिश और नम जलवायु की आवश्यकता होती है ।  

हल्दी की खेती के लिए उपयुक्त तापमान

  • 25-35°C

फसल में पानी की आवश्यकता

  • फसल में पानी की आवश्यकता -1500 मिमी वर्षा के बराबरI

हल्दी की खेती किस मिट्टी में करें?

मिटटी का प्रकार

  • अच्छी जल धारण क्षमता वाली रेतीली से चिकनी दोमट मिट्ठीI
  • जल भराव से बचने के लिए अच्छी ढलान वाली भूमि का चयन किया जाना चाहिए।
  • हल्दी जल भराव जमीन के लिए बहुत संवेदनशील है।

मिटटी का सामू

  • आवश्यक सीमा – 4.5- 7.5
  • यदि पीएच < 4.5 है तो चूना डालें।
  • यदि पीएच > 7.5 है तो जिप्सम डालें।
हल्दी की खेती कब और कैसे करें, क्या उर्वरक डालें,  स्मार्ट टिप्स तथा अनेक जुगाड़, ये सब मिलेंगे आपको भारतअ‍ॅग्री ऍप पर। डाउनलोड करें

रोपाई की सामग्री और हल्दी की किस्में

सेलेम
कालावधी
270 दिन
विशेष लक्षण
सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली किस्म। दिखावट और आकार आकर्षक है। इसमें कुरक्यूमिन की मात्रा कम (2-3%) होती है।
मौसम
जून में बुवाई
उपज
12 क्विंटल प्रति एकड़
प्रगति
कालावधी
180 दिन
विशेष लक्षण
यह एक बौनी किस्म है। पौधे की ऊँचाई 4 फीट से अधिक नहीं होती है। यह छह महीने की किस्म है जिसमें उच्च कुरक्यूमिन तत्व (5%) होता है। जड़ गाँठ निमेटोड के लिए मध्यम प्रतिरोधी है।
मौसम
जून में बुवाई
उपज
12-15 क्विंटल प्रति एकड़
प्रतिभा
कालावधी
270 दिन
विशेष लक्षण
यह अधिक उपज देने वाली किस्म है। योजना की ऊँचाई 5 फीट तक जा सकती है। इसमें उच्च कुरक्यूमिन तत्व (6%) है
मौसम
जून में बुवाई
उपज
15-20 क्विंटल प्रति एकड़

हल्दी की खेती में बीज उपचार

  • कॉपर ऑक्सीक्लोराइड @ 2 ग्राम + डाइमेथोएट 2 मिली प्रति लीटर पानी के साथ सेट का उपचार करें। 
  • इसी तरह 800 किलो बीज के लिए बड़े कंटेनर में 200 लीटर पानी लें।
  • इस घोल में बीज को कम से कम 15-20 मिनट तक डुबाकर रखें।

खेत की तैयारी(मुख्य खेती )

खेत की तैयारी

  • जुताई की विधि – मिट्टी के प्रकार के आधार पर भूमि की 1 या 2 बार जुताई करें।
  • खेत में निम्नलिखित चीजें मिलाएं, और इसे उचित अपघटन के लिए 10 दिनों के लिए खुली हवा में रखें –

               गोबर खाद – 2 टन

               कम्पोस्ट बेक्टेरिया – 3 किलो

  • उपरोक्त मिश्रण को मिट्टी के ऊपर बिखेरें और रोटावेटर को पूरे खेत में चलाएँ जिससे मिट्टी की एक अच्छी सतह  बन जाए
पाएं अपने खेत के अनुसार हल्दी की खेती करने के स्मार्ट दिशा निर्देश भारतअ‍ॅग्री ऍप पर। आज ही डाउनलोड करें। 

हल्दी की खेती में पौधों की दूरी और पौधों की संख्या

किस्में
पंक्ति से पंक्ति (फूट)
1.6
पौधे से पौधा (फूट)
0.9
पौधों की संख्या (प्रति एकड़)
30,555

फसल की बुवाई का समय और विधि

  • बुवाई का समय: 15 मई – जून का पहला सप्ताह
  • दो पंक्ति रोपण का पालन करें अर्थात् 30 सेमी की दूरी पर समतल बिस्तरों पर छोटे गड्ढे तैयार करें और गड्ढों में बीज प्रकंद लगाएं। फिर मिट्टी से ढक दें।

हल्दी की खेती में पोषक तत्व प्रबंधन

  • कुल लागत – 80:40:40 एन:पी:के किलो/एकड़
  • बुवाई के समय- 

                सिंगल सुपर फॉस्फेट- 246 किलोग्राम

                म्युरेट ऑफ पोटॅश- 66 किलोग्राम 

  • बुवाई के 45 दिन के बाद-

                यूरिया- 86 किलोग्राम

  • बुवाई के 75 दिन के बाद-

               यूरिया- 86 किलो

खेत की बाढ़ और ड्रिप सिंचाई

  • बाढ़ सिंचाई – 8 से 10 दिनों के अंतराल पर (वर्षा पर आधारित)
  • ड्रिप सिंचाई- एक दिन के अंतराल 

हल्दी की फसल में अंतर खेती कार्य

  1. गैप फिलिंग- 20 दिनों के बाद बीजों को गैप में डालें जहां अंकुरण नहीं होता है।
  2. मल्चिंग- फसल को हरी पत्तियों के साथ रोपाई के तुरंत बाद मसल दिया जाना चाहिए @ 4.5 टन प्रति एकड़ l
पाएं हल्दी की खेती के बारे में सारी जानकारी सीधे अपने स्मार्टफोन पर। डाउनलोड करें भारतअ‍ॅग्री ऍप

खरपतवार प्रबंधन

प्रत्यारोपण के 3 दिनों के बाद
विधि
छिड़काव
शाकनाशी का नाम
एट्राज़िन 50 डब्ल्यू पी या पेंडीमेथलीन
शाकनाशी मात्रा
200 ग्राम प्रति एकड़ या 600 मिली प्रति एकड़
प्रत्यारोपण के 45 दिनों के बाद
विधि
छिड़काव
शाकनाशी का नाम
पेंडीमेथलीन
शाकनाशी मात्रा
600 मिली प्रति एकड़

फसल में किड और रोग प्रबंधन

rhizome rot disease in turmeric farmingrhizome rot disease in turmeric farming
प्रकन्द सड़ना रोग
लक्षण
प्रकन्द सड जाते हेl
फसलं निविष्ट प्रमाण
मेटालैक्सिल
250.0 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
एकसाथ जड़ोके पास पानी में डालियेl
white grub pest in turmeric plants
हुमणी
लक्षण
पौधे मुरझा जाते हैं और आसानी से उखाड़े जा सकते हैं। बद फसल की वृद्धि होती है।
फसलं निविष्ट प्रमाण
कार्बोफ्युरान
5 किलो प्रति एकड़
प्रयोग
मिक्स करके मिट्टी के उपर डालीयेl
Shoot borer
शूट बोरर
लक्षण
छद्म तने पर एक छेद की उपस्थिति जिसके माध्यम से कीटमल को बाहर निकाला जाता है।
फसलं निविष्ट प्रमाण
नीम तेल
600 मिली प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके छिड़काव करेl
Rhizome scale
रायझोम स्केल
लक्षण
प्रकन्द सुख जाते है और निर्जलीकृत हो जाता है इसके कारण अंकुरण प्रभावित होता है।
फसलं निविष्ट प्रमाण
डायमेथोएट
250 मिली प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके छिड़काव करेl
लीफ ब्लॉच
लक्षण
पत्तियों के दोनों ओर अनियमित भूरे रंग के धब्बे आ जाते है। पत्तिया पिली पड़ जाती है।
फसलं निविष्ट प्रमाण
ऍझोक्सिस्ट्रॉबीन + डायफेनकोनाझोल
300 मिली प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके छिड़काव करेl
leaf roller pest in turmeric
पत्ते मरोडनेवाले कीड़े
लक्षण
कीड़े पत्ते खाते हे, इस कारन पत्ते मरोड़ता हैं।
फसलं निविष्ट प्रमाण
लेम्बडा- सायहॅलोथ्रीन
200 मिली प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके छिड़काव करेl
Leaf eating caterpillar on turmeric plant
पत्ते खानेवाला कीड़ा
लक्षण
पत्ते खानेवाला कीड़ा ⎯ पत्तियों पर छोटे छेद होते है। फिर क्रम में पत्तियों को काटते है।
फसलं निविष्ट प्रमाण
इंडोक्साकार्ब +नोवलूरॉन
250 मिली प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके छिड़काव करेl
Leaf spot disease and its prevention
पत्ति धब्बा
लक्षण
पत्तियों पर सफेद या ग्रे केंद्र के साथ अनियमित भूरे धब्बे आ जाते है। पत्ते खानेवाला कीड़ा ⎯ पत्तियों पर छोटे छेद होते है। फिर क्रम में पत्तियों को काटते हैl
फसलं निविष्ट प्रमाण
मॅंकोझेब
200 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके छिड़काव करेl

फसल की कटाई

कटाई की कालावधी
कटाई की कालावधी
बुआई के 250-270 बाद
कटाई का समय
जनवरी - मार्च

हल्दी की खेती से उपज

उपज
ताजा प्रकंद
120-150 क्विंटल प्रति एकड़
सूखा प्रकंद
25-30 क्विंटल प्रति एकड़

पोस्ट हार्वेस्ट केयर

  •  उबालना- कटाई के बाद 3-4 दिनों के भीतर उबाल लिया जाता है। उंगलियों और बल्बों को अलग-अलग उबालना चाहिए। उँगलियों को 45-60 मिनट तक उबाला जाना चाहिए और बल्ब या मदर राइज़ोम्स बल्ब या मदर राइज़ोम्स 90 मिनट के लिए।
  •  सूखना- पकी हुई उंगलियों को 10-15 दिनों के लिए जमीन पर 5-7 सेंटीमीटर मोटी परतों में फैलाकर धूप में सुखाया जाता है।
  • चमकाने- हात से या मशीन से रगड़के बाहरी सतह को चिकना और चमकाने से उपस्थिति में सुधार होता है।

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