मिर्च की खेती : आधुनिक विधि से लें ज्यादा से ज्यादा उपज

हरी मिर्च की खेती

मिर्च की खेती से अपेक्षा

मिर्च की अपेक्षित उपज

30 क्विंटल प्रति एकड़

फसल की अपेक्षित अवधि

बुवाई से 180-200 दिन

खेती में अपेक्षित खर्चा (रुपये)

61,805 

मिर्च की खेती से अपेक्षित लाभ (रुपये)

1,42,500

जलवायु परिस्थितियाँ

मिर्च के लिए उपयुक्त जलवायु

  •  फूल और फल आने के समय भारी बारिश, बादल का मौसम होने पर फूलों और फलों का झड़ना शुरू हो जाता है|
  •  अधिक आर्द्रता होने पर फलों में सड़न होती है।
  •  प्रकाश की उच्च तीव्रता के कारण फलों को रंग आने में देरी होती है।

मिर्च के लिए उपयुक्त तापमान

  • तापमान 10°C से कम होने पर पौधों की वृद्धि रुक जाती है ।
  • पौधों के प्रारंभिक वृद्धि होने के दौरान  तापमान 30°C से ऊपर होने पर जड़ो की वृद्घि रुक जाती है।
  • यदि तापमान 37 °C से अधिक हो जाता है, तो फल वृद्धि पर विपरीत रूप सें प्रभाव पड़ता है ।
  • 20 से 25°C तापमान मिर्च का अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए अनुकूल रहता है| 

फसल में पानी की आवश्यकता

  • आमतौर पर सिंचित क्षेत्रों में उगाया जाता है।
  • मिर्च की फसल में फूल व फल बनते समय सिंचाई करना अत्यंत आवश्यक हैं।
  • मिर्च की फसल को 800-1200 मिमी वर्षा के बराबर पानी की जरुरत होती है।

मिर्च की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी

मिट्टी का प्रकार

  • अच्छी जल धारण क्षमता वाली रेतीली दोमट मिट्टी

मिट्टी का सामू

  • आवश्यक पी.एच. मान – 6.0-7.0
  • अधिक अम्लीय मिट्टी और क्षारीय मिट्टी मिर्च की फसल लिए उपयुक्त नहीं हैं।
  • पीएच मान  6.0 से कम होने पर मिट्टी में चूना डाले।  
  • पीएच मान 7.0 से ज़्यादा  होने पर मिट्टी में जिप्सम डाले।  
 
 
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रोपाई की सामग्री और मिर्च की उन्नत किस्म

सुपर महा ज्वाला ( संकर किस्म )
कालावधी
70-75 Days
विशेष लक्षण
अत्याधिक पैदावार देने वाली संकर किस्म, अधिक भण्डारण क्षमता, लंबी दूरी के परिवहन के लिए उपयुक्त किस्म व रस चूसने वाले कीट के प्रति सहनशील
मौसम
खरीफ,रबी व ज़ैद
उपज
100- 120 क्विंटल प्रति एकड़

मिर्च की नर्सरी की तैयारी

नर्सरी की तैयारी

विधि- 1

  • 1 एकड़ क्षेत्र में प्रत्यारोपण के लिए 0.08 एकड़ (3 गुंठा) नर्सरी की आवश्यकता होती है।
  • 7.5 मीटर लम्बाई×1.2 मीटर चौड़ाई व 10 सेमी उचाई की छः क्यारियाँ तयार करें। 
  • बीज 7.5 सेमी के अंतराल पर कतार में बोए व मिट्टी से ढक दे। 
  • क्यारियोंको अंकुरन तक प्रति दिन दो बार व अंकुरन के बाद एक दिन पानी दे। 
  • पौधे सख्त बनाने के लिए प्रत्यारोपण से 10 दिन पहले क्यारियों में पानी की मात्रा कम करें और प्रत्यारोपण से एक दिन पहले हल्की सिंचाई करें।
  • बीज अंकुरण के 3 दिनों के बाद पौधोंको कमरतोड़ रोग से बचने के लिए रिडोमिल – 20 ग्राम 10 लीटर पानी में मिलाके क्यारियोंको भीगा दे. 
  • 1 लीटर पानी में  19:19:19 (5 ग्राम) और थायमॉक्साम (0.25 ग्राम) मिलाएं और बुवाई के 25 दिन बाद छिड़काव करें|

विधि- 2

  • हर एक प्रोट्रे में 1.2 किलो के बराबर कोकोपीट भरे। 
  • प्रोट्रे में उपचारित बीज एक खाने में 1 बीज के दर से बोएं। 
  • 6 दिनों के बाद, अंकुरित बीजों के साथ प्रोट्रे को एक शेडनेट के अंदर उठाए गए बेड पर व्यक्तिगत रूप से रखें।
  • बीज को कोकोपीट से ढक दें और अंकुरण शुरू होने तक (5 दिन) ट्रे को एक के ऊपर एक रखें और पॉलीथीन शीट से ढंक दें ।
  • 6 दिनों के बाद, अंकुरित बीज वाले हर एक प्रोट्रे को शेडनेट के अंदर उभरी हुई ऊँची क्यारीयों में रखें।

नर्सरी कालावधी

  • अवधि-  35 दिवस
  • जब पत्तियाँ गहरे हरे रंग की और तना मोटा हो जाता है तब पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं ।
नर्सरी के लिए औसत बीज
किस्म
1 एकड़ क्षेत्र में रोपाई के लिए 400 ग्राम बीज
हाइब्रिड
1 एकड़ क्षेत्र में रोपाई के लिए 100 ग्राम बीज

मिर्च का बीज उपचार

  •   इमिडाक्लोप्रिड- 4 मि.ली.
  • सूचना- एक किलो बीज के लिए उपरोक्त मात्रा 2 लीटर पानी में मिलाएं। बीज को 10 मिनट के लिए घोल में डुबोएं और फिर 15 मिनट तक छाया में सुखाएं।
  • मैंकोजेब- 2 ग्राम
  • सूचना- ऊपरके उपचारित बीजों को फिर से 1 किलो बीज के लिए मनकोजेब 2 ग्राम से उपचारित करें। इसे बीज की सतह पर रगड़कर लगाएं
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मिर्च की खेती के लिए खेत की तैयारी (मुख्य खेती )

खेत की तैयारी

  • जुताई की विधि – मिट्टी के प्रकार के आधार पर भूमि की 1 या 2 बार जुताई करें।
  • खेत में निम्नलिखित चीजें मिलाएं, और इसे उचित अपघटन के लिए 10 दिनों के लिए खुली हवा में रखें –
    1.  गोबर खाद – 2 टन
    2. कम्पोस्ट बेक्टेरिया – 3 किलो
  • उपरोक्त मिश्रण को मिट्टी के ऊपर बिखेरें और रोटावेटर को पूरे खेत में चलाएँ जिससे मिट्टी की एक अच्छी सतह  बन जाए।

क्यारी की तैयारी

  • मेढ़े की तैयारी – ट्रेक्टर की सहायता से ७५ सेमी या ६० सेमी के अंतर से मेढ़े व लकीरें तैयार करें।

दूरी और पौधों की संख्या

किस्में
पंक्ति से पंक्ति (फूट)
1.9 फुट
पौधे से पौधा (फूट)
1.9 फुट
पौधों की संख्या (प्रति एकड़)
11111
हायब्रिड
पंक्ति से पंक्ति (फूट)
2.4 फुट
पौधे से पौधा (फूट)
1.9 फुट
पौधों की संख्या (प्रति एकड़)
9000

पौधों की जड़ों को डुबोने की प्रक्रिया

  •  समतल कंटेनर में 20 लीटर पानी लें।
  • 40 ग्राम कार्बेन्डाजिम + 40 मिली इमिडाक्लोप्रिड पानी में मिलाये। 
  • जडोंको रोपाई से पहले ऊपरी मिश्रण में 5 मिनट के लिए डुबोये।
  •  ट्रे की पौधोंके लिए, पूरी ट्रे ऊपरी द्रवणमें 5 मिनट के लिए डुबोकर रखे।

मिर्च के पौधों का प्रत्यारोपण

  • पौधोंको 60 सेमी की दुरी पर मेढोंपे लगाए 

मिर्च की खेती में पोषक तत्व प्रबंधन

  • 40:20:20 किलोग्राम एन:पी:के प्रति एकड़।
  • बुवाई के समय (प्रति एकड़)-यूरिया -29 किलो।
  • सिंगल सुपर फॉस्फेट – 122 किलो।
  • म्यूरेट ऑफ़ पोटॅश – 34 किलो।
  • रोपाई के 30 दिन बाद – 22 किलो यूरिया डाले। 
  • रोपाई के 45 दिन बाद – 22 किलो यूरिया डाले।

खेत की सिंचाई

  • ड्रिप- एक दिन के अंतराल
  • बाढ़ सिंचाई- सप्ताह में एक बार (वर्षा पर आधारित)
  • गर्मी का मौसम- 5-6 दिन का अंतराल
  • मिर्च की हर कटाई के बाद एक सिंचाई देनी चाहिए
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मिर्च की खेती में अंतर खेती कार्य

मिर्च में खरपतवार प्रबंधन

नोट – बेहतर परिणाम के लिये सभी शकनाशी में स्टिकर मिलाये

प्रत्यारोपण के 3 दिनों के बाद
तरीका
छिड़काव
शाकनाशी नाम
ऍट्राझीन 50 डब्ल्यूपी या पेंडीमिथॅलीन
शाकनाशी मात्रा
100 ग्राम प्रति एकड 400 ग्राम प्रति एकड
प्रत्यारोपण के 30 दिनों के बाद
तरीका
छिड़काव
शाकनाशी नाम
ओक्सीफ्लूरोफेन
शाकनाशी मात्रा
400 मिली/एकड

वृद्धी नियामक

  • पुष्पन में वृद्घि लाने के लिए प्रत्यारोपण के बाद 20, 40, 60 दिन पर ट्राइकैन्टानॉल @ 1.25 मिली प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें।
  • फुलों का झड़ना कम करने और फलोंमें वृद्घि के लिए नॅपथॅलीक ऍसिटिक ऍसिड 2 मिली प्रति लीटर पानी मे रोपाई के बाद 60 और 90 दिन पे छिड़काव करें

मिर्च के रोग और किड प्रबंधन

मिर्च का आद्रगलन रोग

लक्षण
पौधों का कमजोर होना और सुख जाना।
फसल निविष्ट मात्रा
कॉपर ऑक्सिक्लोराईड
250.0 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
एकसाथ जड़ोके पास पानी में डालिये

रसशोषक किडी

तुडतुडे, पांढरी माशी, मावा

लक्षण
पत्तिया मुड़ जाती है, पौधे में पीलापन होता है।
फसल निविष्ट मात्रा
थायोमीथाक्साम
100 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे

मिर्च में सफ़ेद चूर्णी रोग

powdery mildew disease of chilli plant
लक्षण
पत्तोंपर और सारे हिस्सोंपर पावडर जैसे सफ़ेद दाग दिखाई देते है।
फसल निविष्ट मात्रा
सल्फर
200 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे

मिर्च का फ्यूजेरियम विल्ट

fusarium wilt disease in chilli farming
लक्षण
निचले (पुराने) पत्तों लक्षण दिखाई देते है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है,नयी पत्तियां भी प्रभावित होती हैं और पौधे अंततः मर जाते हैं। कई मामलों में, केवल एक शाखा या पौधे के किनारे लक्षण दिखाते हैं। बेल के सूखने के बाद पत्ती के किनारे सूखते है।
फसल निविष्ट मात्रा
मेटॅलॅक्सिल + मॅंकोझेब
200 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे

फल छेदक

Fruit borer of chilli
लक्षण
फल छेदनेवाली अली ⎯ अंडे से निकलनेके बाद अली विकसित होनेवाले फल में छेद करती है और गूदा, विकसित होनेवाले बीज, ऊतको को खाती है | प्रभावित फलों को बाद में कवक और जीवाणु द्वारा हमला किया जाता है जिसके परिणामस्वरूप सड़न होती है।क्षति के विशिष्ट लक्षण आक्रामक गंध, प्रवेश छिद्रों से निकलने वाला अली का उत्सर्जन और छिद्रों के आसपास चिपका हुआ कूड़ा हैं।
फसल निविष्ट मात्रा
थायोमेथाक्साम + लेम्बडा सायहॅलोथ्रीन
100 मिली प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे

मिर्च में फल सड़

fruit rot in chilli farming
लक्षण
फल सड़ ⎯ ये कवक के कारण होने वाली बीमारी है। फलों पर भूरे-काले धब्बे होते है। तब रोगग्रस्त फल सड़ जाएंगे और नीचे गिर जाएंगे।
फसल निविष्ट मात्रा
कॉपर ऑक्सिक्लोराईड
200ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे

कटाई

कटाई की कालावधी
कटाई की कालावधी
70 से 150 दिनों के बाद
कटाई की संख्या
8 से 10
कटाई अंतराल
10 दिन

मिर्च की खेती से उपज

उपज
प्रत्येक फसल की मात्रा
५-८ क्विंटल प्रति एकड़
कुल फसल की मात्रा
40-50 क्विंटल प्रति एकड़

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