Red Chilli

लाल मिर्च

अपेक्षा

अपेक्षित उपज

15-20 क्विंटल प्रति एकड़

अपेक्षित अवधि

बुवाई से 200-220 दिन

अपेक्षित खर्चा (रुपये)

74,977

अपेक्षित लाभ (रुपये)

1,75,000

जलवायु परिस्थितियाँ

जलवायु
  • शिमला मिर्च की तुलना में लाल मिर्च को गर्म मौसम अधिक अनुकूल होता है। 
  • मिर्च प्रकाश के प्रति संवेदनशील नहीं होती (दिन की लम्बाई की असर पुष्पन या फल धारणा पर नहीं होती)
तापमान
  • मिर्च के विकास के लिए दिन का तापमान 20 से 30°C अनुकूल है।
  • यदि रात का तापमान 24°C से अधिक हो तो फल धारणा पर प्रतिकूल असर पड़ता है। 
  • यदि तापमान लम्बे समय तक 15°C से कम या 32°C से अधिक हो जाता है तब विकास और उपज कम हो जाते हैं।
फसल में पानी की आवश्यकता
  • सामान्यतः इन्हें सिंचित क्षेत्रों में उगाया जाता है।
  • मिर्च में पुष्पन और फल धारणा सबसे महत्वपूर्ण चरण होते हैं। इन चरणों में पानी की आवश्यकता होती है। 
  • पानी की आवश्यकता-800-1200 मिमी बारिश के बराबर।

मिट्टी

प्रकार
  • मिर्च के लिए अच्छी जल धारण क्षमता वाली दोमट या सिल्ट दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है, पर इसे अच्छी जल निकासी वाली किसी भी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है।  
सामू
  • आवश्यक पीएच मान-मिट्टी का पीएच 5.5 और 6.8 के बीच होना चाहिए।
  • मिर्च उगाने के लिए अत्यधिक अम्ल और क्षारीय मिट्टी उपयुक्त नहीं हैं।
  • यदि पीएच < 5.5 है तो चूना डालें।
  • यदि पीएच >6.8 है तो जिप्सम डालें।

रोपाई की सामग्री

एलाचिपुर सनम -एस4 प्रकार
कालावधी
150-200 दिन
विशेष लक्षण
महाराष्ट्र के अमरावती जिले में उगाई जाती है, लाल रंग और बहुत तीखी, केप्सिसिन-0.2%
मौसम
खरीफ
उपज
2-2.5 क्विंटल/एकड़
गुंटुर सन्नाम -एस4 प्रकार
कालावधी
200 दिन
विशेष लक्षण
आंध्रप्रदेश के गुंटूर, वारंगल, खम्मम जिलों में उगाई जाती है छिलका मोटा, तीखा और लाल केप्सिसिन-0.226%
मौसम
खरीफ
उपज
25 क्विंटल/एकड़
ब्याडगी (कड्डी)
कालावधी
150 दिन
विशेष लक्षण
कर्नाटक के धारवाड़ इलाके में उगाई जाती है लाल रंग और कम तीखी या बिलकुल तीखी नहीं कटाई का मौसम -जनवरी से मई
मौसम
खरीफ
उपज
8-10 क्विंटल/एकड़
मध्य प्रदेश जी.टी. सन्नम
कालावधी
150-200 दिन
विशेष लक्षण
मध्यप्रदेश के इंदौर, मलकापूर चिखली और एलाचपुर इलाकों में उगाई जाती है लाल रंग और तीखी कटाई का मौसम - जनवरी से मार्च
मौसम
खरीफ
उपज
5-7 क्विंटल/एकड़

नर्सरी की तैयारी

नर्सरी की तैयारी
  • विधि -1
  • 1 एकड़ क्षेत्र में रोपाई के लिए, 0.08 एकड़ (3 गुंटा) नर्सरी की आवश्यकता होती है।
  • 7.5 मी लंबाई X 1.2 मी चौड़ाई X 10 सेमी ऊंचाई आकार की छः क्यारियाँ तैयार करें।
  • बीज को 7.5 सेमी पंक्ति में बोएं और मिट्टी से ढक दें।
  • नर्सरी क्यारियों को अंकुरण होने तक प्रतिदिन दो बार और अंकुरण होने के बाद  एक बार पानी दें।
  • प्रत्यारोपण के दस दिन पहले ही अंकुरित पौधों को मजबूत बनाने के लिए नर्सरी क्यारियों को पानी देना कम करें।
  • बीज के अंकुरण के 3 दिनों के बाद, अंकुरित पौधों को आर्द्र गलन रोग से बचाने के लिए, 10 लिटर पानी में रिडोमिल @ 20 ग्राम मिलाकर क्यारियों को भिगोएं।
  • बुवाई के 25 दिनों के बाद 19:19:19 @ 5 ग्राम + थायोमेथोक्साम @ 0.25 ग्राम प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें।
  • विधि -2
  • प्रोट्रे को कोकोपीट @ 1.2 किलो प्रति ट्रे से भरें। 
  • प्रो ट्रे में उपचारित बीजों को एक बीज प्रति सेल ऐसी बुवाई करनी चाहिए।
  • बीज को कोकोपीट से ढँक दें और ट्रे को एक के ऊपर एक रखें और अंकुरण शुरू होने तक पॉलीथीन शीट से ढँक कर रखें  (5 दिन)।
  • 6 दिनों के बाद, प्रोट्रे को अंकुरित बीजों के साथ शेड नेट में अलग रखें।
नर्सरी कालावधी
  • कालावधी – 35 दिन 
  • 3-4 पत्तियाँ दिखाई देने पर और तना मोटा हो जाने पर पौधों का प्रत्यारोपण कर सकते हैं।
नर्सरी के लिए औसत बीज
किस्म
1 एकड़ क्षेत्र में प्रत्यारोपण के लिए 380- 400 ग्राम बीज

बीज उपचार

बीज को  इनके साथ उपचारित करें   

  • इमिदाक्लोप्रिड- 4 मिली

 निर्देश – उपरोक्त मात्रा को एक किलो बीज के लिए दो लीटर पानी में मिलाएं। बीज को 10 मिनट के लिए घोल में डुबोया और फिर 15 मिनट तक छाँव में सुखाएं।

  • कार्बेन्डाजिम – 2 ग्राम 

निर्देश – उपचारित बीज को फिर से 1 किलो बीज के लिए 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम के साथ से उपचारित करें। इसे बीज की सतह पर रगड़कर बीज पर लगाएं।

खेत की तैयारी(मुख्य खेती )

खेत की तैयारी
  1. जुताई विधि – मिट्टी के प्रकार के आधार पर  भूमि की 1 या 2 बार जुताई करें।
  2. खेत में निम्नलिखित चीजें मिलाएं, और इसे उचित विघटन के लिए 10 दिनों के लिए खुली हवा में रखें – 
    1. गोबर खाद – 2 टन 
    2. कम्पोस्ट बेक्टेरिया – 2 किलो 
  3. उपरोक्त मिश्रण को मिट्टी के ऊपर बिखेरें और रोटावेटर को पूरे खेत में चलाएँ जिससे मिट्टी की एक अच्छी सतह  बन जाए
क्यारी की तैयारी
  • क्यारी की तैयारी- ट्रैक्टर की मदद से  मेड़ और कुंड में 75 फीट की दूरी रखकर क्यारियाँ तैयार करें।

दूरी और पौधों की संख्या

किस्में
पंक्ति से पंक्ति
1.9 फिट
पौधे से पौधा
0.9 फिट
पौधों की संख्या (प्रति एकड़)
22,220
हायब्रिड
पंक्ति से पंक्ति
1.5 फिट
पौधे से पौधा
1.5 फिट
पौधों की संख्या (प्रति एकड़)
19,750

जड़ों को डुबोने की प्रक्रिया

  • समतल बर्तन में 20 ली.पानी लें।
  • 40 ग्राम  कार्बेनडेज़िम + 40 मिली इमिडाक्लोप्रिड मिलाएं।
  • प्रत्यारोपण से पहले जड़ों को घोल में डुबोएं।
  • प्रो ट्रे वाले पौधों के लिए – प्रो ट्रे को 5 मिनट के लिए कंटेनर में डुबोएं। 

प्रत्यारोपण

  • अंकुरित पौधों को मेड़ पर 60 सेंमी की दूरी पर प्रत्यारोपित करें। 

पोषक तत्व प्रबंधन

  • 40:20:20 एन:पी:के किलो/एकड़ 
  • बुवाई के समय लागू करें –  यूरिया- 44 किलो, सिंगल सुपर फॉस्फेट – 122 किलो, म्यूरेट ऑफ पोटॅश- 34 किलो 
  • प्रत्यारोपण के 30 दिनों बाद -22 किलो यूरिया
  • प्रत्यारोपण के 45 दिनों बाद -22 किलो यूरिया

सिंचाई

  • ड्रिप – एक दिन के अंतराल।
  • बाढ़ सिंचाई- हफ्ते में एक बार (बारिश पर आधारित)।
  • गर्मी के मौसम में -5-6 दिनों के अंतराल पर।
  • मिर्च की हर कटाई के बाद एक सिंचाई की जानी चाहिए। यदि अत्यदिक सिंचाई की आवश्यकता हो तो दिन की शुरुआत में ही करें जिससे रात होने तक पत्ते सूख जाएं।

अंतर खेती कार्य

  • 2 टन प्रति एकड़ धान का भूसा इस्तेमाल करें जड़ों के भाग में तापमान कम करने के लिए प्लास्टिक मल्च को भूसे से ढँक दें।
  • स्टेकिंग (पौधे को सहारा देना)- पौधों पर जब फलों का वजन अधिक हो तब उनका उखड़ना कम करने के लिए स्टेकिंग या सहारा देना पड़ता है, पुष्पन के समय हर एक पौधे को सहारा देना पड़ता है।
  • बुवाई के 30-40 दिनों के बाद विरलन और अंतर भरण करना चाहिए।

खरपतवार प्रबंधन

प्रत्यारोपण के 3 दिनों के बाद
विधि
छिड़काव
शाकनाशी का नाम
अट्राज़ीन 50 डब्लू पी (100 ग्राम प्रति एकड़) या पेंडीमेथलीन (400 मि.ली.प्रति एकड़)
प्रत्यारोपण के 30 दिनों के बाद
विधि
छिड़काव
शाकनाशी का नाम
ओक्सीफ्लुरोफेन (100 मि.ली.प्रति एकड़)

वृद्धी नियामक

  • पुष्पन को बढ़ाने के लिए प्रत्यारोपण के 20, 40, 60 दिन और 60 दिनों के बाद ट्राइकॉन्टानॉल @ 1.25 मिली प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। 
  • फूलों की गिरावट को कम करने के लिए और फल धारणा में वृद्धी होने के लिए 60 और 90 दिनों के बाद नेफ़थलिक एसिटिक एसिड 2 मिली प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें।

किड और रोग प्रबंधन

मृदा जनित रोग
लक्षण
पौधे ख़राब हो कर सूख जाती है। कम अंकुरण या कुछ स्थितियों में अंकुरण बंद हो जाता हैं। बीज ख़राब हो जाती है। नए पौधों के साथ-साथ बड़े पौधों पर भी संक्रमण दिखाई देता है
फसल सामग्री मात्रा
ट्रायकोडर्मा व्हिरीडी
40 ग्राम प्रति एकड
प्रयोग
रोपाई से पहले जड़े मिश्रण में डुबाए
रसशोषक किडी
लक्षण
पत्ते मुड़ जाते हैं। पत्तों पर चांदी के रंग के दाग दिखते हैं । पत्ते ऊपर की तरफ मूडप जाते है। पत्तोंपर या तनोपर छोटे कीड़े नजर आते है।
फसल सामग्री मात्रा
थायोमीथाक्साम
100 ग्राम प्रति एकड
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे
पश्चमारी
लक्षण
पत्ते कोने से पिले हो जाते है और सूखने लगते है। फल का सड़ना और सूखना संक्रमित ऊती फिर भूरी हो जाती है और मर जाती है।
फसल सामग्री मात्रा
मॅंकोझेब
400 ग्राम प्रति एकड
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे
फ्यूजेरियम विल्ट
लक्षण
शुरवात में पत्तिया हलके पीले रंग की दिखती है और उपर के पत्ते मुरझाते है उसके बाद पूरा पौधा मुरझाता है और पत्ते ऊपर और अंदर की ओर मूड जाते है। पत्ते पिले हो जाते हे और मर जाते है।
फसल सामग्री मात्रा
कार्बेन्डाझिम
200 ग्राम प्रति एकड
प्रयोग
एकसाथ जड़ोके पास पानी में डालिये
सफ़ेद चूर्णी रोग
लक्षण
संक्रमित पत्तियों में सफ़ेद से लेकर हल्के भूरे रंग के पाउडर जैसे दाग होते हैं। पत्तियों की ऊपर और नीचे की सतह पर भूरे रंग की चूर्णी दिखाई देती है।
फसल सामग्री मात्रा
सल्फर
200 ग्राम प्रति एकड
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे
आद्रगलन रोग
लक्षण
पौधों के प्रभवित हिस्से ज्यादा छोटे नजर आते हैं।
फसल सामग्री मात्रा
मेटॅलिक्सिल
250 मिली प्रति एकड
प्रयोग
एकसाथ जड़ोके पास पानी में डालिये
Fruit borer of chilli
फल छेदक
लक्षण
फेरोमोन ट्रैप( गंध पाश) कीटकों को आकर्षित करती है। फलों पर छोटे छेद बन जाते है। तनोपर और फलोंपर कीड़े छेद करते है।
फसल सामग्री मात्रा
थायोमेथाक्साम + लेम्बडा सायहॅलोथ्रीन
200 मिली प्रति एकड
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे

कटाई

कटाई की कालावधी
कटाई की कालावधी
200-220 दिन (किस्म के आधार पर)
कटाई की संख्या
5 से 6
कटाई अंतराल
10 दिन

उपज

उपज
प्रत्येक फसल की मात्रा
1.5 से 2 क्विंटल प्रति एकड़ (किस्म के आधार पर)
कुल फसल की मात्रा
15-20 क्विंटल प्रति एकड़

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *