Mango

आम

अपेक्षा

अपेक्षित उपज

300-500 फल/पेड़ (9 साल बाद )

अपेक्षित अवधि

30-40 साल 

अपेक्षित खर्चा (रुपये)

37,447

अपेक्षित लाभ (रुपये)

1,60,000

जलवायु परिस्थितियाँ

जलवायु
  • जब आम का पौधा छोटा होता है तब वह अत्यधिक पाला सहन नहीं कर पाता है।
  • पुष्पन से पहले अधिक फुल खिलने के लिए शुष्क मौसम अच्छा होता है।
  • पुष्पन के समय बारिश होना फसल के लिए हानिकारक है क्योंकि इससे परागण में बाधा आती है। पर, फल निर्माण के दौरान फसल के लिए बारिश से लाभ होता है मगर भारी बारिश से पकने वाले फलों को नुकसान होता है। 
  • फल निर्माण के दौरान तेज़ हवा और चक्रवात से बहुत सारे फल गिर जाते हैं। 
तापमान
  • आम के विकास चरण में अधिक आर्द्रता और आदर्श तापमान 24-30°C  है। 
  • आम के लिए अधिक तापमान हानिकारक नहीं है पर कम आर्द्रता और तेज हवाओं की वजह से इनका पेड़ पर विपरीत असर पड़ता है।
  • सर्दियों में औसत न्यूनतम तापमान 5°C से अधिक होना चाहिए।
  • पूरा पेड़ फलों से भरा हो तब कम तापमान से फल छोटे आकार के और पीले पड़ जाते हैं।  ज्यादातर ऐसे फलों की वजह से उपज घट जाती है। 
  • अत्यधिक तापमान वाले क्षेत्रों (45 °C) में आम के पेड़ों का विकास और उत्पादन बहुत अच्छा होता है। हालाँकि जब अधिकतम तापमान 46°C से ज्यादा हो जाए और हवा में नमी भी कम हो तब वानस्पतिक वृद्धि रुक जाती है।   
फसल में पानी की आवश्यकता
  • फ़सल को 900-1100 मिमी बारिश के बराबर पानी की आवश्यकता होती है।

मिट्टी

प्रकार
  • आम की खेती के लिए दोमट, जलोढ़, अच्छी जल निकासी वाली, हवादार  और जैविक तत्वों से भरपूर गहरी मिट्टी (2-2.5 मी) आदर्श मानी जाती है। 
  • आम की खेती अच्छे तरीके से खाद दी गई हलकी जमीन में भी हो सकती है।  
  • क्षारीय और खारी जमीन का उपयोग नहीं करना चाहिए।  
  • आम के पेड़ मिटटी में अधिक नमक की मात्रा को सहन नहीं कर सकते। 
सामू
  • आवश्यक पीएच मान- 5.5-7.5
  • यदि पीएच < 5.5 है तो चूना डालें
  • यदि पीएच >7.5 है तो जिप्सम डालें 

रोपाई की सामग्री

अल्फ़ान्सो (हाफुस)
कालावधी
नियमित फल धारण
विशेष लक्षण
बहुत अच्छा स्वाद, रंग और टिकाऊपन, मौसम में फल जल्दी लगते हैं, निर्यात के लिए अच्छा, एकान्तरिक फल धारक, प्रक्रिया के बाद भी फल की खुशबु वैसी ही रहती है, स्पॉन्जी टिश्यू के प्रति संवेदनशील
उपज
150-250 फल/पेड़
रत्ना
कालावधी
नियमित फल धारण
विशेष लक्षण
हर साल बड़े फल लगते हैं
उपज
250-300 फल/पेड़
सिन्धु
कालावधी
नियमित फल धारण
विशेष लक्षण
अधिक गूदा, हर साल फल लगना, फल की सतह पर आकर्षक लाल रंग, मध्यम आकार के फल, स्पॉन्जी टिश्यू से मुक्त
उपज
200-225 फल/पेड़
केसर
कालावधी
नियमित फल धारण
विशेष लक्षण
अधिक उपज देनेवाला, हाफुस आम से अधिक उपज, खाने के लिए अच्छा होता है
उपज
400-500 फल/पेड़
पायरी
कालावधी
एकान्तरिक फल धारक
विशेष लक्षण
रस के लिए अच्छा, कम टिकाउपन, एकान्तरिक फल धारण
उपज
250-300 फल/पेड़
सुवर्णा
कालावधी
नियमित फल धारण
विशेष लक्षण
हर साल फल लगते हैं, एक सामान आकार के फल, खाने के लिए अच्छे, जल्दी पकने वाले, स्पॉन्जी टिश्यू से मुक्त
उपज
250 फल/पेड़

खेत की तैयारी(मुख्य खेती )

खेत की तैयारी
  • पिछली फसल के कचरे को हटाने के लिए खेत को साफ करें।
  • बारिश शुरू होने से पहले मई महीने में 1 x 1 x 1 मीटर का गढ्ढा बनाएं।  
  • 2 टन गोबर खाद और 3 किलो विघटनकारी बैक्टीरिया मिलाएं और इन्हें समान मात्रा में हरेक गढ्ढे में डालें (5 किलो प्रति गढ्ढा) 

दूरी और पौधों की संख्या

भारी मिट्टी
पंक्ति से पंक्ति
32 फिट
पौधे से पौधा
32 फिट
पौधों की संख्या (प्रति एकड़)
40
हलकी मिट्टी
पंक्ति से पंक्ति
26 फिट
पौधे से पौधा
26 फिट
पौधों की संख्या (प्रति एकड़)
65
आम्रपाली उच्च घनत्व रोपाई
पंक्ति से पंक्ति
16 फिट
पौधे से पौधा
16 फिट
पौधों की संख्या (प्रति एकड़)
225

बुवाई

  • आम की रोपाई गुठली से या कलम बाँधकर भी हो सकती है। 
  • पौधों का वानस्पतिक प्रसरण कलम बाँधने जैसी कई तकनीकों द्वारा किया जा सकता है। 
  • बारिश की शुरुआत होते ही तैयार की गई कलम लगाएं।
  • मुख्य क्षेत्र (गढ्ढे) में प्रत्यारोपण करने से पहले प्लास्टिक बैग निकाल दें।
  • रासायनिक उपचार बीज को दीमक से बचाने के लिए प्रत्यारोपण के समय 100 ग्राम 2% मिथाइल पैराथियोन या 10% कार्बारिल पावडर मिलाकर गढ्ढे में डालें।

जड़ों को डुबोने की प्रक्रिया

  • समतल बर्तन में 30 ली.पानी लें।
  • 60 ग्राम कार्बेनडेज़िम + 60 मिली इमिडाक्लोप्रिड मिलाएं। 
  • प्रत्यारोपण से पहले जड़ों को घोल में डुबोएं।

रोपाई का समय

  • रोपाई का समय: जून से सितम्बर 

पोषक तत्व प्रबंधन

  • पहले वर्ष में-गोबर खाद-1किलो + 120:150:50 एन:पी:के ग्राम/पौधा यूरिया -260 ग्राम, सिंगल सुपर फॉस्फेट – 920 किलो, पोटाश की म्यूरेट- 85 किलो
  • दुसरे वर्ष में-गोबर खाद-2 किलो + 240:300:100 एन:पी:के ग्राम/पौधायूरिया -520 ग्राम, सिंगल सुपर फॉस्फेट – 1845 किलो, पोटाश की म्यूरेट- 167 किलो
  • तीसरे वर्ष में-गोबर खाद-3 किलो + 360:450:150 एन:पी:के ग्राम/पौधा, यूरिया -780 ग्राम, सिंगल सुपर फॉस्फेट – 2767 किलो, पोटाश की म्यूरेट- 250 किलो
  • चौथे वर्ष में-गोबर खाद-4 किलो + 480:600:200 एन:पी:के ग्राम/पौधा, यूरिया -1040 ग्राम, सिंगल सुपर फॉस्फेट – 3690 किलो, पोटाश की म्यूरेट- 334 किलो
  • पांचवे वर्ष में-गोबर खाद-5 किलो + 600:750:250 एन:पी:के ग्राम/पौधा, यूरिया -1300 ग्राम, सिंगल सुपर फॉस्फेट – 4612 किलो, पोटाश की म्यूरेट- 418 किलो
  • छठे वर्ष में-गोबर खाद-6 किलो + 720:900:300 एन:पी:के ग्राम/पौधा, यूरिया -1560 ग्राम, सिंगल सुपर फॉस्फेट – 5535 किलो, पोटाश की म्यूरेट- 500 किलो
  • सातवें वर्ष में-गोबर खाद-7 किलो + 840:1050:359 एन:पी:के ग्राम/पौधा, यूरिया -1830 ग्राम, सिंगल सुपर फॉस्फेट – 6460 किलो, पोटाश की म्यूरेट- 600 किलो
  • छठे वर्ष में-गोबर खाद-8 किलो + 960:1200:400 एन:पी:के ग्राम/पौधा, यूरिया -2085 ग्राम, सिंगल सुपर फॉस्फेट – 7380 किलो, पोटाश की म्यूरेट- 668 किलो
  • नौवें वर्ष में-गोबर खाद-9 किलो + 1080:1350:450 एन:पी:के ग्राम/पौधा, यूरिया -2345 ग्राम, सिंगल सुपर फॉस्फेट – 8300 किलो, पोटाश की म्यूरेट- 750 किलो
  • 10 वर्ष और ऊपर-गोबर खाद 10 किलो + 1200:1500:500 एनपीके ग्राम/पेड़, यूरिया -2600 ग्राम,  सिंगल सुपर फॉस्फेट – 9225 किलो, पोटाश की म्यूरेट- 835 किलो
  • नोट: बारिश शुरू होने पर ऊपर दी हुई गोबर खाद की पूरी मात्रा और एनपीके की आधी मात्रा डालें और एनपीके की बची हुई मात्रा सितम्बर-अक्तूबर में डालें।

सिंचाई

 

1 साल

सूखे के मौसम में 2-3 दिनों के अंतराल में सिंचाई करें

2-5 साल

4-5 दिनों के अंतराल में सिंचाई करें

5-8 साल / फल धारण से परिपक्वता तक

10-15 दिनों के अंतराल में सिंचाई करें

पूर्ण फल धारणा चरण

फल धारण के बाद  2-3 सिंचाई

अंतर खेती कार्य

  • गर्मी के मौसम में अत्यधिक गरमी से बचने के लिए पेड़ के तने पर बोर्डो मिश्रण लगाएं।
  • खाद डालने से पहले खरपतवार निकालें।

खरपतवार प्रबंधन

रोपाई के 10 दिन पहले
विधि
छिड़काव
शाकनाशी का नाम
ग्लाइफोसेट (500 मि.ली.प्रति एकड़)
रोपाई के ३० दिन बाद
विधि
छिड़काव
शाकनाशी का नाम
पेराक्वाट (500 ग्रॅम प्रति एकड़) या अट्राज़ीन (400 ग्रॅम प्रति एकड़)

वृद्धी नियामक

  • फल धारणा बढाने के लिए पुष्पन के समय नॅफथ्यालिन ऍसिटिक ऍसिड @ 20 पीपीएम का छिड़काव करें।
  • फरवरी में यदि फुल नहीं खिले तो पुष्पन बढाने के लिए 0.5% यूरिया (5 ग्राम/ली) या 1% पोटेशियम नाइट्रेट (10 ग्राम/ली) का छिड़काव करें।  
  • फलों का आकार सरसों जितना हो जाने पर 2 % पोटॅशिअम नायट्रेट के छिड़काव से फल धारणा और टिकाऊपन बढ़ता है।
  • जिन पेड़ों में फल नहीं लगते हों उनके लिए सितम्बर के पहले पखवाड़े के दौरान पेक्लोब्युट्राजोल @ 10 ग्राम प्रति पेड़ का उपयोग करने से पुष्पन बढ़ता है और फल लगते हैं।

किड और रोग प्रबंधन

फल का काला सिरा और आंतरिक परिगलन
लक्षण
कच्चे फलोंके कोनेवाला हिस्सा काला हो जाता हे और कठिन बन जाता है।
फसल सामग्री मात्रा
बोरॅक्स
300 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे
फल का गिरना
लक्षण
अकाली फल गिर जाते है।
फसल सामग्री मात्रा
नॅपथॅलीन ऍसिटिक ऍसिड
300 मिली प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे
फ्यूजेरिम विल्ट और डायबैक
लक्षण
गुच्छा रोग, फूल का काला पड़ना
फसल सामग्री मात्रा
कॉपर ऑक्सिक्लोराईड
300 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे
पश्चमारी
लक्षण
वनस्पति ऊपर से निचे सुखना चालू होती हे , बादमे पत्ते भी सुख जाते हे , ज्यादातर प्रभाव पुराने वनस्पति म देखे देता है।
फसल सामग्री मात्रा
कॉपर ऑक्सिक्लोराईड
450 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे
लाल विगलन रोग
लक्षण
शुरुवात में गोल, भूरे रंग के दाग पत्तोंपर नजर आते है , ये दाग बादमे एकसाथ आते हे।
फसल सामग्री मात्रा
बोर्डो मिक्सचर
300 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे
शामव्रण रोग
लक्षण
पत्तोंपर अनियमित आकर के भूरे रंग के स्पॉट नजर आते है। वनस्पति के नए तने सुख जाते है। भंडारण के वक्त फलोंपर काले द्दग नजर आते है।
फसल सामग्री मात्रा
कॉपर ऑक्सिक्लोराईड
300 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे
सफ़ेद चूर्णी रोग
लक्षण
पत्तोंपर और सारे हिस्सोंपर पावडर जैसे सफ़ेद दाग दिखाई देते है। प्रभावित फूल नहीं खुलते हैं और ज्यादातर मामलों में समय से पहले ही गिर जाते हैं।
फसल सामग्री मात्रा
सल्फर
300 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे
फुलकिडे
लक्षण
प्रभावित वन्सपतिपर स्वर्ण छठा दिखती हे और छोटे दाग भी नजर आते है। निम्फ और वयस्क ऊतकों को ढीला करते हैं और ओज़िंग सेल सैप को चूसते हैं
फसल सामग्री मात्रा
थायोमीथाक्साम
300 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे
पत्ता वेबर
लक्षण
शुरु में कीड़े पत्ते खाते है, और उसके बाद में पत्तोंपर जाली बन जाती है। इस जाली के अंदर ये कीड़े रहते है।
फसल सामग्री मात्रा
क्विनालफॉस
मिली प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे
फल-मक्खी
लक्षण
फेरोमोन ट्रैप( गंध पाश) कीटकों को आकर्षित करती है। कीड़े फलोंके अंदर का हिस्सा खा जाते हे इस कारण फलोंमें सड़ांध होती है।
फसल सामग्री मात्रा
फेरोमोन ट्रॅप्स
5 ट्रॅप्स प्रति एकड़
प्रयोग
खेत मे लगाये
आम का गुजिया
लक्षण
चिपचिपा द्रव्य उगलता है जिस कारण काले रंग का कुकुरमत्ता तयार होता है। कीड़े पेड़ पर चढ़ते हे और इस कारण फूल गीर जाते हे और फल विकसित होने में परेशानी आती है।
फसल सामग्री मात्रा
क्लोरपायरीफॉस
25 मिली प्रति एकड़
प्रयोग
पेड़ के बाजुमें गड्ढा (रिंग)करके उसमे डाले
आम का फुदका / भुनगा किट
लक्षण
कीड़े छेद कर देते हे जिस कारण चिपचिपा द्रव्य आता हे और प्रभावित हुए पत्ते तह होजाते हे और सुख जाते है।
फसल सामग्री मात्रा
डायमेथोएट
450 मिली प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे

कटाई

कटाई की कालावधी
कटाई की कालावधी
कटाई चरण- हरे परिपक्व चरण में आम की कटाई होती है।
कटाई का समय
अप्रैल - जून
कटाई की शुरुआत
5 वर्ष बाद कटाई की शुरुआत होती है (किस्म के अनुसार)।

उपज

उपज
5-8 साल
200-300 फल/पेड़
9 साल और ऊपर
300-500 फल/पेड़

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