Groundnut

मूंगफली

अपेक्षा

अपेक्षित उपज

क्विंटल प्रति एकड़

अपेक्षित अवधि

बुवाई से 180-200 दिन

अपेक्षित खर्चा (रुपये)

61,805 

अपेक्षित लाभ (रुपये)

1,42,500

जलवायु परिस्थितियाँ

जलवायु
  • गर्म और आर्द्र परिस्थितियाँ बहुत अनुकूल होती हैं।
  • ठंडी और बरसाती जलवायु के परिणामस्वरूप, अंकुरण और पौधों की उभार धीमी हो जाती हैं, जिससे बीजों का सड़ना और पौधों में रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
तापमान
  • तेजी से अंकुरण होने के लिए और अंकुरीत पौधों के विकास के लिए उचित तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस होता है।
  • 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान मूंगफली के विकास को रोकता है।
  • बुवाई के समय कम तापमान अंकुरन में देरी करता है और साथ ही बीज और पौधों के बीमारियों को बढ़ाता है।
  • परिपक्वता के दौरान पौधों को लगभग एक महीने की गर्म और शुष्क मौसम की आवश्यकता होती है।
फसल में पानी की आवश्यकता
  • अधिकतम उपज और मूंगफली की अच्छी गुणवत्ता के लिए, पुष्पन, नस्से बनने के समय, और फली बनने के सबसे महत्वपूर्ण चरणों में जल की उपलब्धता आवश्यक होती है। 
  • पानी की आवश्यकता- 600-1500 मिमी बारिश के बराबर। 

मिट्टी

प्रकार
  • अच्छी जल निकासी, हल्के रंग की,भुरभुरी दोमट व बलुई दोमट भूमि
सामू
  • आवश्यक पी.एच. मान – 5.5 से 7.0
  • पीएच मान 5.5 से कम होने पर मिट्टी में चूना डाले।
  • पीएच मान 7.0 से ज़्यादा होने पर मिट्टी में जिप्सम डाले।
  • मूंगफली उगाने के लिए अत्यधिक अम्ल और क्षारीय मिट्टी उपयुक्त नहीं हैं।

रोपाई की सामग्री

फुले प्रगती
कालावधी
85-90 दिन
विशेष लक्षण
प्रारंभिक, गैर फैलाव वाली किस्म का प्रकार (उपाती)
मौसम
खरीफ
उपज
7-8 क्विंटल प्रति एकड़
विक्रम (टीजी 1)
कालावधी
90-100 दिन
विशेष लक्षण
अर्ध फैलाव वाली किस्म का प्रकार
मौसम
गर्मी
उपज
8-9 क्विंटल प्रति एकड़
फुले उन्नति
कालावधी
115 दिन
विशेष लक्षण
उच्च उपज
मौसम
खरीफ़, गर्मी
उपज
9 क्विंटल प्रति एकड़
कोंकण गौरव
कालावधी
105-120 दिन
विशेष लक्षण
अर्ध फैलाव वाली किस्म का प्रकार
मौसम
खरीफ़, गर्मी
उपज
7-8 क्विंटल प्रति एकड़
कोंकण टपोरा
कालावधी
115-120 दिन
विशेष लक्षण
बड़े बीज
मौसम
रबी
उपज
8.0 क्विंटल प्रति एकड़
बीज दर
किस्म
50 किग्रा/ एकड़
हाइब्रिड
40 किग्रा/ एकड़

बीज उपचार

बीज को  इनके साथ उपचारित करें  

  • इमिडाक्लोप्रिड- 2 मिली

 निर्देश – उपरोक्त मात्रा को एक किलो बीज के लिए दो लीटर पानी में मिलाएं। बीज को 10 मिनट के लिए घोल में डुबोएं और फिर 15 मिनट तक छाँव में सुखाएं।

  • कार्बेंडाझिम- 2 ग्राम  

निर्देश – उपचारित बीज को फिर से 1 किलो बीज के के लिए 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम के मात्रा से उपचारित करें। इसे बीज की सतह पर रगड़कर बीज पर लगाएं।

खेत की तैयारी(मुख्य खेती )

खेत की तैयारी
  1. जुताई विधि – मिट्टी के प्रकार के आधार पर  भूमि की 1 या 2 बार जुताई करें।
  2. खेत में निम्नलिखित चीजें मिलाएं, और इसे उचित अपघटन के लिए 10 दिनों के लिए खुली हवा में रखें – 

गोबर खाद – 2 टन 

कम्पोस्ट बेक्टेरिया – 2 किलो 

  1. उपरोक्त मिश्रण को मिट्टी के ऊपर बिखेरें और रोटावेटर को पूरे खेत में चलाएँ जिससे मिट्टी की एक अच्छी सतह  बन जाए।
क्यारी की तैयारी
  1. क्यारियों की तैयारी- ट्रेक्टर की सहायता से 1 फीट या 1.5 फीट के अंतर से मेढ़े व लकीरें तैयार करें।

दूरी और पौधों की संख्या

किस्में
पंक्ति से पंक्ति (फूट)
1 फीट
पौधे से पौधा (फूट)
0.3 फीट
पौधों की संख्या (प्रति एकड़)
1,12,820
हायब्रिड
पंक्ति से पंक्ति (फूट)
1.4 फीट
पौधे से पौधा (फूट)
0.3 फीट
पौधों की संख्या (प्रति एकड़)
1,04,761

बुवाई

  • बुवाई से एक सप्ताह पहले फली का छिलका निकाल देना चाहिए। बुवाई के लिए मध्यम आकार के दानों का उपयोग किया जाना चाहिए।
  • मेढोंकी के बाजुओं पे 4-5 सेमी गहराई पर हल की मदत से, या हाथ से बीज बोना चाहिए 
  • मानवीय(हाथ) पद्धति में कम बीज की आवश्यकता होती है और अंकुरण भी बेहतर होता है।

पोषक तत्व प्रबंधन

  • 10:20:00 एन:पी:के किलो प्रति एकड़।  
  • बुवाई के समय – यूरिया- 22 किग्रा , सिंगल सुपर फॉस्फेट- 123 किग्रा ,जिप्सम- 80 किग्रा  
  • बुवाई के 45 दिनों के बाद   80 किग्रा जिप्सम  (उत्पाद को बेहतर बनाने के लिए जिप्सम डाला जाता है)।

सिंचाई

  • बाढ़ सिंचाई- 8-10 दिनों के अंतराल पर 
  • गर्मी का मौसम -5-6 दिनों के अंतराल पर 
  • बुवाई के 4-5 दिनों के बाद पहली सिंचाई करनी चाहिए
  • सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण चरण-
    • पुष्पन चरण (बुवाई से 20-30 दिन बाद)
    • नस्से बनने का समय (बुवाई से 40-45 दिन बाद)
    • फली विकास होने का चरण (बुवाई से 60-70 दिन बाद)

अंतर खेती कार्य

  • खाली जगह भरना-  जहाँ पौधे अंकुरित नहीं हुए है, वहाँ बुवाई के 10-12 दिन बाद 1 बीज प्रति छेद की दर से बीज बोए और तुरंत सिंचाई करें।
  • मिट्टी चढ़ाना-
    • बुवाई के 40-45 दिनों के बाद ही मिट्टी चढ़ाना चाहिए।
    • यह नस्सों को मिट्टी में प्रवेश करने के लिए मदद करता है और फली विकास में भी मदद करता है। 

खरपतवार प्रबंधन

बुवाई के 3 दिनों के बाद
विधि
छिड़काव
शाकनाशी का नाम
अट्राज़ीन (100 ग्राम/एकड़ ) या पेन्डीमेथालिन (400 ग्राम/एकड़ )
बुवाई के 45 दिनों के बाद
विधि
छिड़काव
शाकनाशी का नाम
इमेझथेपीर (100 ग्राम/एकड़) या क्विज़ालोफ़ॉप इथाइल (100 ग्राम/एकड़)

वृद्धी नियामक

  • पुष्पन और उपज को बढ़ाने के लिए बुवाई के 30 दिन और 60 दिनों के बाद ट्राइकॉन्टानॉल @ 1.25 मिली प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें।

किड और रोग प्रबंधन

White grub pest
हुमणी
लक्षण
फसल की वृद्धि कम होना, क्षतिग्रस्त जड़ें, पौधों का सुखना
फसल सामग्री मात्रा
कार्बोफ्युरान
5 किलो प्रति एकड़
प्रयोग
मिक्स करके मिट्टी के उपर डालीये
बीज से होनेवाले रोग
लक्षण
कम अंकुरण या कुछ स्थितियों में अंकुरण बंद हो जाता हैं।
फसल सामग्री मात्रा
कार्बेन्डाझिम
40 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
प्रति किलो बिजो के हिसाब से मिश्रण करे
जंग
लक्षण
पत्तोके निचे नारंगी रंग के दाग नजर आते है।
फसल सामग्री मात्रा
मॅंकोझेब
200 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे
म्लानि रोग
लक्षण
प्रभावित वनस्पति जडोंसे आसानी से खींची जा सकती है। शुरुवात के कालावधि में तनोपर लाल-भूरे रंग के दाग नजर आते है।
फसल सामग्री मात्रा
मेटॅलिक्सिल
500 मिली प्रति एकड़
प्रयोग
एकसाथ जड़ोके पास पानी में डालिये
चना फली छेदक
लक्षण
ये कीड़े फूल या कलियाँ खाते है।
फसल सामग्री मात्रा
इंडोक्साकार्ब +नोवलूरॉन
200 मिली प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे
पत्तो पे आने वाले धब्बे
लक्षण
पत्तोके ऊपरी हिस्सेपर लाल या पिले रंग के दाग नजर आते है।
फसल सामग्री मात्रा
कॉपर ऑक्सिक्लोराईड
200 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे
पत्ते खाने वाली किड
लक्षण
कीड़े पत्तोंको खाते हे और उनके अंदर का रस शोषण करते हे, इस कारण पत्तोंपर छोटे भूरे रंग के दाग नजर आते है।
फसल सामग्री मात्रा
लेम्बडा- सायहॅलोथ्रीन
200 मिली प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे

कटाई

कटाई की कालावधी
कटाई की कालावधी
बुवाई के 110 से 140 दिनों के बाद
परिपक्वता के लक्षण
जब पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं, जब फलियों का बाहरी आवरण कठोर हो जाता है।
कटाई विधि
मूंगफली की फसल को फली की खुदाई करके या पौधों को खेत से खींचकर बाहर निकाला जाता है।

उपज

उपज
खरीफ
7- 8 क्विंटल प्रति एकड़
ग्रीष्मकालीन
10-12 क्विंटल प्रति एकड़

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