Fenugreek

मेथी

अपेक्षा

अपेक्षित उपज

5000 गुच्छा प्रति एकड़ 

अपेक्षित अवधि

बुवाई से 30-40 दिन

अपेक्षित खर्चा (रुपये)

12,064

अपेक्षित लाभ (रुपये)

30,000

जलवायु परिस्थितियाँ

जलवायु
  • ठंडी और तुलनात्मक रूप से शुष्क जलवायु फसल के लिए उपयुक्त होती है।
  • पुष्पन और अनाज भरने के चरण में पाला पड़ने से फसल प्रभावित होती है।
  • फ़सल को मैदानी इलाकों में सालभर उगाया जा सकता है।
  • खेती के लिए अधिकतर रबी मौसम अच्छा होता है।
  • भारी और निरंतर बारिशवाले क्षेत्रों में  खेती नहीं करनी चाहिए।
तापमान
  • तापमान सीमा 10-27.5°C होती है।
  • उच्च तापमान से अंकुरण प्रतिशत और वनस्पति विकास कम होता है।
फसल में पानी की आवश्यकता
  • मध्यम से कम बारिश की आवश्यकता होती है।
  • पानी की आवश्यकता-350-380 मिमी बारिश के बराबर।

मिट्टी

प्रकार
  • जैविक पदार्थों से भरपूर चिकनी या रेतीली चिकनी और मध्यम काली मिट्टी खेती के लिए सबसे उपयुक्त होती है।
  • जल भराव वाली मिट्टी का उपयोग नहीं करना चाहिए।
सामू
  • आवश्यक सीमा – 5.5-7.0
  • अत्यधिक एसिड और क्षारीय मिट्टी उपयुक्त नहीं होती हैं।
  • यदि पीएच < 5.5 है तो चूना डालें।
  • यदि पीएच > 7.0 है तो जिप्सम डालें।

रोपाई की सामग्री

पूसा अर्ली बंचिंग
कालावधी
30-35 दिन
विशेष लक्षण
मृदुरोमिल आसिता, सड़न के लिए प्रतिरोधी
मौसम
रबी
उपज
30 क्विंटल/एकड़
राजेंद्र क्रांती
कालावधी
120 दिन
विशेष लक्षण
अधिक उपज देनेवाली बीज किस्म, मध्यम ऊंचाई, अधिक तना, एक फसल या अंतर फ़सल के लिए भी अनुकूल होता है। बीज की उपज के लिए अच्छा होता है
मौसम
रबी
उपज
12-15 क्विंटल/एकड़
बीज दर
किस्म
10-12 किलो /एकड़

बीज उपचार

  • उचित अंकुरण के लिए बुवाई से पहले बीज को 12 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखें।
  • बीज को  इनके साथ उपचारित करें   

               कॉपर ऑक्सीक्लोराइड – 2 ग्रॅम

               इमिडाक्लोप्रिड- 2 मि.ली.

निर्देश – एक किलो बीज के लिए उपरोक्त मात्रा मिलाएं। उपरोक्त सभी सामग्री एक बर्तन में डालें और तब तक मिलाएं जब तक बीज इस पाउडरी मटेरियल से लेपित हो जाए।

खेत की तैयारी(मुख्य खेती )

खेत की तैयारी
  1. जुताई विधि – मिट्टी के प्रकार के आधार पर भूमि की 1 या 2 बार जुताई करें।
  2. खेत में निम्नलिखित चीजें मिलाएं, और इसे उचित विघटन के लिए 10 दिनों के लिए खुली हवा में रखें – 

               गोबर खाद – 22 टन

               कम्पोस्ट बेक्टेरिया – 2 किलो

            3. उपरोक्त मिश्रण को मिट्टी के ऊपर बिखेरें और रोटावेटर को पूरे खेत में चलाएँ जिससे मिट्टी की एक अच्छी सतह  बन जाए।

क्यारी की तैयारी
  1. क्यारीयों की तैयारी- ट्रैक्टर की मदद से सुविधाजनक लंबाई और ऊंचाई वाली क्यारियाँ बनाएँ। फिर एक कोने में बीज के बहाव को रोकने के लिए छोटे बाँध बनाएँ।

बुवाई

  • क्यारियों पर समान रूप से बीजों को डालें।
  • लगभग 8-15 दिनों में बीज अंकुरित हो जाएंगे।

पोषक तत्व प्रबंधन

  • कुल आवश्यकता: 24:12:12 एन : पी :के किलो प्रति एकड़। 
  • बुवाई के समय लागू करें-

               यूरिया- 26 किलो

               सिंगल सुपर फॉस्फेट – 74 किलो

               म्यूरेट ऑफ़ पोटॅश- 20 किलो

  • बुवाई के 30 दिनों के बाद-

               यूरिया- 26 किलो

सिंचाई

  • बाढ़ सिंचाई- पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद दी जाती है।
  • दूसरी सिंचाई बुवाई के तीसरे दिन की जाती है।
  • बाद में मिट्टी के प्रकार के आधार पर 5-6 दिनों के अंतराल पर दी जाती है।

अंतर खेती कार्य

  • विरलन – बुवाई के 20-25 दिनों के बाद पौधों में विरलन किया जाता है और निकाले गए अंकुरित पौधों को हरी सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
  • विशेष प्रणाली – लगभग 4 इंच की ऊंचाई पर एक छंटाई करने से शाखाएं उगने में मदद मिलती है। 

खरपतवार प्रबंधन

बुवाई के 3 दिनों के बाद
विधि
छिड़काव
शाकनाशी का नाम
ओक्सीफ्लुरोफेन + क्विज़ालोफ़ॉप इथाइल (500 मि.ली. + 250 मि.ली./एकड़)

वृद्धी नियामक

  • बेहतर विकास और अधिक ऊँचाई के लिए अंकुरण के बाद जल्द ही ट्रायकोन्टानोल @ 0.5 मि.ली./लीटर पानी + जिबरेलिक एसिड @ 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें।

किड और रोग प्रबंधन

म्लानि रोग, रूट रॉट
लक्षण
फसल की वृद्धि कम होना, क्षतिग्रस्त जड़ें, पौधों का सुखना
फसल सामग्री मात्रा
कॉपर ऑक्सिक्लोराईड
200 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
एकसाथ जड़ोके पास पानी में डालिये।
कवक रोग
लक्षण
प्रभावित पत्तियां छोटे, गहरे भूरे रंग के धब्बे विकसित करती हैं जो अक्सर आकार में बढ़ते हैं, और जो अंततः पत्तियों को मारते हैं
फसल सामग्री मात्रा
मॅंकोझेब
100 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे।
बीज से होनेवाले रोग
लक्षण
कम अंकुरण या कुछ स्थितियों में अंकुरण बंद हो जाता हैं।
फसल सामग्री मात्रा
कार्बेन्डाझिम
120 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
बीजप्रक्रिया
पर्ण सुरंगक
लक्षण
अली पत्तो के उपर सफेद रंग कि छटा बनाती है।
फसल सामग्री मात्रा
लेम्बडा- सायहॅलोथ्रीन
100 मिली प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे।
पांढरी भुरी
लक्षण
संक्रमित पत्तियों में सफ़ेद से लेकर हल्के भूरे रंग के पाउडर जैसे दाग होते हैं।
फसल सामग्री मात्रा
सल्फर
100 ग्राम प्रति एकड़
प्रयोग
पानी में मिक्स करके फवारणी करे।

कटाई

कटाई की कालावधी
फसल अवधि
बुवाई के 30-40 दिनों के बाद
पहली कटाई
बुवाई से 25-30 दिनों के बाद
दूसरी कटाई
15 दिनों के अंतराल पर

उपज

उपज
कुल फसल की मात्रा
25-28 क्विंटल/एकड़ (5000 गुच्छा प्रति एकड़)

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