प्याज के रोग जो कर देंगे पूरी फसल ख़राब- पर्पल ब्लॉच और जलेबी रोग

प्याज के रोग

किसान भाइयों इस समय पर दो ऐसे प्याज के रोग हैं जो आपकी प्याज की फसल को पूरा बर्बाद कर सकते हैं। यह रोग है पर्पल ब्लॉच (purple blotch) और जलेबी रोग (onion twister) . आइये जानते है इनके बारे में पूरी जानकारी।

प्याज में पर्पल ब्लॉच

किसान भाइयों प्याज की फसल में बैंगनी धब्बा (पर्पल ब्लॉच) रोग आमतौर पर सभी प्याज उगाने वाले क्षेत्रों में देखा जाता है।

👉 प्याज का यह रोग एक फंफूदी जनित रोग है एवं यह प्याज की पत्तियों, तनों और डंठलों पर लगता है। पर्पल ब्लॉच रोग पुरानी पत्तियों के किनारों से शुरू होता है।

प्याज में पर्पल ब्लॉच के लक्षण :-

▶️ शुरुआत में इस रोग के लक्षण पत्तियों पर छोटे, अंडाकार पीले, भूरे धब्बे जो आगे चल कर बैगनी रंग के हो जाते हैं तथा इन धब्बो के किनारे पीले रंग के होते हैं। जब धब्बे बड़े होने लगते है तब पीले किनारे फ़ैल कर ऊपर नीचे घाव बनते है।

🍀 पर्पल ब्लॉच रोग के प्रकोप से पत्तियां व फूलों के तने, कंद, आती प्रभावित होते हैं। अधिक संक्रमण होने पर पत्तियां मुरझा कर मर जाती है और पौधा सूख जाता है। रोग ग्रस्त भाग पर सफेद भूरे रंग के धब्बे बनते हैं, जिनका मध्य भाग बाद में बैंगनी रंग का हो जाता है। इस रोग से भंडारण के समय में प्याज सड़ने लगती है, जिससे भारी क्षति होती है। 😱

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पर्पल ब्लॉच रोग के नियंत्रण के उपाय :-

  1. प्रमाणित बीजों का ही चुनाव करें।
  2. यदि संभव हो, तो बुवाई और रोपाई मौसम की शुरुआत में करें।
  3. प्याज की प्रतिरोधी किस्मों का चुनाव करें।
  4. रोपाई के समय पौधों के बीच की दूरी एक सामान रखें।
  5. नाइट्रोजन और फ़ॉस्फोरस को निश्चित मात्रा में प्रयोग करें।
  6. खेत और मेढ़ों को खरपतवार मुक्त रखें।
  7. फसल की खुदाई के बाद संक्रमित फसल अवशेषों को नष्ट कर दें।
  8. बुवाई से पूर्व प्याज के बीज को विटावैक्स पावर (कार्बोक्सिन 37.5% + थीरम 37.5% डीएस) @ 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम से शोधित करना चाहिए।
  9. रासायनिक नियंत्रण के लिए टेबुकोनाज़ोल 25.9% ईसी @ 250 से 300 मिली या एज़ोक्सीस्ट्रोबिन 11% + टेबुकोनाज़ोल 18.3% एससी @ 300 मिली या मेटिराम 55% + पायराक्लोस्ट्रोबिन 5% डब्ल्यूजी @ 600 से 700 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें।

 

👩‍🌾 किसान भाइयों बैंगनी धब्बा (पर्पल ब्लाच) रोग के अलावा एक और रोग है जिससे आपकी 🧅 प्याज की फसल पूरी तरह बर्बाद हो सकती है।

 

प्याज में जलेबी रोग

प्याज का यह रोग बहुत ही घातक है क्योंकि यह पत्तों को मोड़कर और विकृत करके प्याज के उत्पादन को प्रभावित करता है।😱

जलेबी रोग के लक्षण

👉 यह रोग प्याज के पत्तों के मुड़ने, पीले पड़ने और जलेबी रोग के नाम से जाना जाता है।
👉 गर्दन के असामान्य बढ़ाव का कारण बनता है, और पतले बल्बों का निर्माण होता है जो भंडारण के दौरान सड़ जाते हैं।
👉 आप प्याज की पत्तियों पर धूसर धब्बे भी देखेंगे जिससे फसल की उपज में भी कमी आती है

जलेबी रोग का नियंत्रण एवं उपाय

  1. सर्वप्रथम समतल एवं उचित जल निकास वाली मिट्टी का चयन करें।
  2. खेत में प्रति एकड़ 8 से 10 पीले स्टिकी ट्रैप एवं 8 से 10 नीले स्टिकी ट्रैप स्थापित करें।
    खेत एवं खेत की मेढ़ों को खरपतवार मुक्त रखें। समय समय पर निराई गुड़ाई करें।
  3. मिट्टी परीक्षण के अनुसार खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करें।

प्याज में जलेबी रोग के नियंत्रण के लिए निम्नलिखित छिड़काव फायदेमंद रहेंगे –

  1. इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल (कॉन्फिडोर) 8 मिली + बाविस्टीन 15 ग्राम + सिलिकॉन स्टिकर 8 मिली प्रति पंप छिड़काव करें।
  2. 4-5 दिनों के बाद मिक्स माइक्रोन्यूट्रिएंट 15 ग्राम + सीवीड एक्सट्रैक्ट (इफको सागरिका) 30 मिली प्रति पंप छिड़काव करें।
  3. फसल में आवश्यकता पड़ने पर लैम्ब्डा साइहलोथ्रिन 5 ईसी (देव शक्ति-धनुका) 8 मिली + कार्बेन्डाजिम 12% + मैनकोजेब 63% डब्ल्यूपी (धानुका-सिक्सर) 30 ग्राम + सिलिकॉन स्टिकर 8 मिली प्रति पंप स्प्रे करें।
  4. फसल में गंभीर लक्षण होने पर कार्बेन्डाजिम 50 डब्ल्यूपी (धनुस्टिन-धनुका) 30 ग्राम + सीवीड एक्सट्रैक्ट (इफको सागरिका) 30 मिली प्रति पंप छिड़काव करें।

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