कम्पोस्टिंग बैक्टीरिया से बनाएं पोषक गोबर खाद

कम्पोस्टिंग बैक्टीरिया से बनाएं पोषक गोबर खाद

नमस्ते किसान भाइयों और बहनों 🙏🏼

🤝🏼भारतअ‍ॅग्री का इस्तेमाल करने वाले हजारों किसान आज कम लागत में ज्यादा उत्पादन के साथ 👨‍🌾 स्मार्ट खेती कर रहे हैं। आप भी स्मार्ट किसान बन सकें, इसलिए हम हर रोज 👉 कृषि से जुड़ी नई जानकारियां लेकर आपसे मिलने आ रहे हैं। ✅ यह जानकारी आपकी खेती के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। इसलिए पूरी जानकारी जरूर पढ़ें और स्मार्ट किसान बनें! 👍🏻

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जल्द ही खरीफ सीजन शुरू होने वाला हैं। किसानों ने अभी से खरीफ के लिए तैयारी शुरू कर दी हैं। ऐसे में हम किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आए हैं। जिसकी मदद से यह खरीफ सीजन किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। 

किसान भाइयों आप इस बार खरीफ फसलों में कम्पोस्टिंग बैक्टीरिया का उपयोग करें। 

इससे आपको काफी फायदे होते हैं। इससे फसलों को भरपूर पोषण मिलता है। वहीं, इसके उपयोग से फसलों की पैदावार में वृद्धि होती है।

भारत में अधिकांश क्षेत्रों में खेतों में गोबर की खाद खरीफ फसल से पहले दी जाती हैं गोबर की खाद को अच्छी कम्पोस्टिंग ( विघटन ) के लिए निर्धारित समय एवं मापदंडों की आवश्यकता होती हैं इसमें कई बार किसान कच्ची खाद खेतों में डाल देते हैं जिससे खरपतवार ज्यादा आते है एवं मृदा जनित बीमारियां एवं कीट का प्रकोप अधिक होता है

साथ ही आजकल की खेती में प्रयुक्त इनपुट रसायन एवं उर्वरक का अधिक उपयोग होने से प्राकृतिक रूप से उपलब्ध कम्पोस्टिंग में सहायक बैक्टीरिया की संख्या बहुत कम हो गई है। जिससे की खाद ठीक से कम्पोस्ट नहीं हो पाती हैं।

इसलिए खाद को अच्छे से कम्पोस्ट करने के लिए खाद के उपयोग से कम से कम 10 दिन पहले 1 किलो कम्पोस्टिंग बैक्टीरिया प्रति टन खाद के अनुसार मिलाकर छायादार स्थान पर रखे उसके बाद खाद को मिलाये।

कम्पोस्टिंग बैक्टीरिया आप की गोबर की खाद को पूर्ण कम्पोस्ट करते है जिससे की फसल को भरपूर पोषण मिलता हैं और उपज अधिक होते हैं।

विभिन्न फसलों जैसे कपास, मिर्च, सोयाबीन, मक्का, धान, गन्ना आदि में कम से कम 3 टन खाद में 3 किलो कम्पोस्टिंग बैक्टीरिया प्रति एकड़ के मान से मिलाये।

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